पद्मश्री निरंजन गोस्वामी

**पद्मश्री निरंजन गोस्वामी**

मूक अभिनय के शलाखा पुरुष के अनुभवों को महाराष्ट्र की संस्था ब्लैक सॉइल ने संजोया है। अभी अभी उसका 'प्रोमो' जारी किया गया। जिसमें निरंजन दादा अपने अनुभवों की झोली से एक एक मोती निकलते दिख रहे हैं। इस साक्षात्कार निर्माण का निर्देशन डॉ सुरभि बिप्लव ने कुशलता से किया है। सिनेमेटोग्राफर राजदीप जी ने इसके छायांकन का भार ही नहीं वहन किया अपितु जटिल तकनीकी पक्ष को भी निखारा है। कुछ ही दिनों में पूरी कृति सबके सामने होगी। हम आशान्वित व प्रतीक्षारत हैं।

निरंजनगोस्वामी

निरंजन गोस्वामी भारतीय माइम कलाकार और मंच निर्देशक हैं, जिन्हें भारत में माइम कला रूप को आगे बढ़ाने का श्रेय दिया जाता है । वह इंडियन माइम थिएटर के संस्थापक हैं , जो एक समूह है, जो 'मूक अभिनय" की कला को बढ़ावा देता है ।

उन्होंने अपने करियर की शुरुआत 1960 के दशक के अंत में बहुरूपी के साथ की थी, जो बंगाल की स्थानीय थिएटर ग्रुप है, लेकिन बाद में रवीन्द्र भारती विश्वविद्यालय से थिएटर कोर्स में शामिल हुए। उन्होंने माइम को बढ़ावा देने के लिए इंडियन माइम थिएटर की स्थापना की तथा भारत और विदेशों में अनेक प्रदर्शन किये। वह नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा (NSD) और कई अन्य थिएटर संस्थानों में विजिटिंग प्रोफेसर हैं। उन्हें 2002 में संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार मिला। भारत सरकार ने उन्हें कला में उनके योगदान के लिए 2009 में पद्म श्री का चौथा सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया।

श्री निरंजन गोस्वामी के नेतृत्व में भारतीय माइम थिएटर ने चौवालीस साल का लंबा और सक्रिय सफर पार कर लिया है। IMT 1976 में अपनी स्थापना के बाद से ही थीम व कथा आधारित लघु प्रस्तुति और दीर्घावधि की प्रस्तुति जैसी दोनों का निर्माण कर रही है।

हम सभी निरंजन सर के दीर्घायु की कामना करते हैं।

माइम

प्रदर्शन कला  माइम या मूकाभिनय में वाचिक अभिनय के उपयोग के बिना, शरीर की गति के माध्यम से या केवल आंगिक अभिनय द्वारा एक कहानी प्रस्तुत करने से है । पहले के समय में, अंग्रेजी में, ऐसे कलाकार को आम तौर पर "मम्मर" कहा जाता था ।

माइम का प्रदर्शन प्राचीन ग्रीस से शुरू होता है ; जो एकल नर्तक/ नर्तकी से लिया जाता है जिसे पैंटोमिमस कहा जाता है ,  मध्ययुगीन यूरोप में इसके शुरुआती रूप जैसे कि मम्मर नाटक और बाद में डमशॉ विकसित हुए। उन्नीसवीं सदी के शुरुआती दौर में, जीन- गैसपार्ड डेबोरौ ने इसमें कई विशेषताओं को ठोस किया जिसे आधुनिक समय के अनुरूप माना जाता है।

ब्लैक सॉइल थियेटर Black Soil Theatre (2018)

अपने प्रकाट्य दिवस से ही यह समूह रंगमंच और सिनेमा के अकादमिक पक्षों को लोगों तक डिजिटल मध्यम से पहुंचाता है, तथा नाट्य प्रस्तुति के साथ लघु फिल्मों का भी निर्माण करता है।

Dr. Surabhi Biplove

महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय के प्रदर्शनकारी कला विभाग में अतिथि प्राध्यापिका हैं। ब्लैक सॉइल थिएटर की अध्यक्ष। कुशल अभिनेत्री व निर्देशिका हैं। जिन्होंने इस साक्षात्कार को पूर्ण किया है।

Rajdeep Rathor

सिनेमाटोग्राफर राजदीप ने इसके छायांकन के साथ साथ सम्पादन के कार्यभार को सम्हाला है।

सभी को इस सार्थक प्रयास के लिए साधुवाद 💐


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